अर्जुन को गांडीवधारी इसलिए कहा जाता है क्योंकि उनके पास 'गांडीव' नामक एक अत्यंत शक्तिशाली और दिव्य धनुष था。 यह धनुष केवल एक अस्त्र नहीं था, बल्कि अर्जुन की वीरता की पहचान बन गया था। महाभारत के अनुसार, जब अग्निदेव को खांडव वन जलाने के लिए अर्जुन और श्रीकृष्ण की सहायता की आवश्यकता थी, तब उन्होंने वरुण देव से प्रार्थना कर यह धनुष अर्जुन को दिलवाया था。
महाभारत युद्ध के कई वर्षों बाद, जब पांडवों ने स्वर्गारोहण की यात्रा शुरू की, तब अग्नि देव के निर्देश पर अर्जुन ने गांडीव धनुष को पुनः को समुद्र में विसर्जित कर दिया था। gandivdhari arjun in hindi
नीचे अर्जुन के जीवन, उनके पराक्रम और उनके दिव्य धनुष 'गांडीव' पर आधारित एक संक्षिप्त मार्गदर्शिका दी गई है: 1. गांडीव धनुष का परिचय gandivdhari arjun in hindi
वे बिजली की गति से बाण चलाने में सक्षम थे। gandivdhari arjun in hindi
अर्जुन के व्यक्तित्व में एक विशेष चमक और आभा थी।